कभी कभी भूल जाता हूँ खुद को

कभी कभी भूल जाता हूँ खुद को,
फिर याद आती है तू, तो याद आता हूँ मैं।
कभी-कभी सो जाता हूँ,
जब सपने आते हैं तो जागता हूँ।

रुका हुआ हूँ वहीं जहाँ था।
भटका हुआ हूँ अब और भी ज्यादा
मैं कहाँ हूँ, कहाँ जाना चाहता हूँ?
तेरे पीछे के पन्ने पलटूँ तो देखता हूँ
मैं किसी सफर पर था,
पर तुझे देख कर भूल गया था राह,
भूल गया था खुद को।
और आज भी कभी याद आती है तू,
तो याद आता हूँ मैं।
भटका हुआ हूँ आज भी,
और आज भी कभी-कभी भूल जाता हूँ खुद को।

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