मौसमी नदी

मौसमी नदी है एक
बारिशें न जाने कहाँ होती हैं –
मौसम ये कहाँ बरसता है
कुछ अहसास होता है
इसके आने का।
धीरे धीरे
नदी का पानी
चढ़ता है,
चौखट को छू कर
उतर जाता है।

आँसू नहीं आते आँख में
या यूँ कहूँ
आते तो हैं
पर आँखें भीगती नहीं इनमें।
कुछ देर ठहरते हैं
चौखट के कोने छू कर
सूख जाते हैं।

मौसमी नदी है एक
एक मौसम है –
बस अहसास होता है जिसके आने का
और लौट जाने का।.

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ज़हर ही सही

हवाएँ महँगी हैं
और ज़हरीली भी
फिर क्यों इनमें साँस लेना चाहता हूँ?
कि मुझे कुछ नहीं मिला कभी
पीना चाहता हूँ –
ज़हर ही सही।

मरूँगा या मर चुका हूँ
पी कर देखते हैं।
सोऊँगा या सो चुका हूँ –
बता दो
मार डालो मुझे
देखूँ तो
जान है क्या अभी भी बाकी।
इन महँगी
ज़हरीली हवाओं को
सूँघने तो दो
मुझे भी मरने दो
पीने दो
ज़हर
अपनी रूह का।