मैं और तू

मैं रात हूँ अगर
तू सुबह हो जा,
भोर में, बस इक पहर, मिल तो सकेंगे।

मैं दिन हूँ अगर
तू धूप हो जा,
किसी पहर भी ये ना हो, कि मुझमें तू ना हो।

तू बादल अगर है,
तो बूँद मैं बनूँ
चलूँ भी तुझसे दूर तो तुझमें ही मिलूँ।

है सागर अगर तू, नदी मैं ना बनूँ।
वो कश्ती कि डूबूँ, तो तुझमें ही रहूँ।

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तन्नु, मन्नू और टीपू सुल्तान का रॉकेट

– दीदी, नाक में कुछ घुस गया।
– नाक में घुस गया तो मुँह क्यों खोल के बैठी है?
– नाक से मुंह में जा रहा है। बीच में फँस गया।
– छी! गन्दी लड़की। नाक बंद कर और साँस छोड़।
– वो कैसे करते हैं?
– जैसे नाक छिनकते हैं।
– नहीं हो रहा।
– पहले मुँह बंद कर।

“तन्नु!”

– अम्मा बुला रही है।
– मुझे नहीं बुलाया।
– तो बैठी रह। अभी टीपू सुल्तान आएगा, तुझे रॉकेट में बाँध के उड़ा देगा।
– टीपू सुल्तान कौन है?
– कोई राजा है।
– उसके पास बहुत सारे रॉकेट हैं?
– हाँ, बहुत बड़े-बड़े।
– मुझे तो छोटा वाला रॉकेट चाहिए।
– अरे दीवाली तो बीत गई; अब अगले साल चलाएंगे, बड़ा वाला। अम्मा से बोल तेरी नाक साफ़ करेगी।
– बड़ा वाला रॉकेट?