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शायद मैं भी कभी राइटर बन जाऊँ…

ये ब्लॉग किस लिए है? या यूँ कहूँ कि मैं लिखता ही क्यों हूँ? “इंटरनेट ऑफ थिंग्स” की दुनिया में पहुंचने से पहले का इंटरनेट, जिसे हम इस्तेमाल करते हैं,  माना बहुत काम का टूल है – इसकी यूटिलिटी गिनाना शुरू करूँ तो लिस्ट ख़त्म नहीं होगी – पर लेखकों और जर्नलिस्ट्स की दुनिया में इसका योगदान, आज नहीं तो कल जरूर ऐतिहासिक माना जाएगा।  इंटरनेट है, और आप लिख सकते हैं, पर ऐसा नहीं है कि लिखना आसान हो गया है; हाँ, पब्लिश होना आसान है अब : एक ब्लॉग शुरू कीजिये, जब मन करे लिखिए; जो मन कहे, कहिये। जो पहले आप डायरी में लिखते थे, आज सीधा पब्लिश कर सकते हैं। असंपादित कंटेंट की बाढ़ में एक और नाला जोड़ने की मुझे कोई चाह नहीं है। पर जो लिखता हूँ उसे बेहतर करना चाहता हूँ।

दो-तीन प्रोजेक्ट्स पे काम कर रहा हूँ। प्रोजेक्ट क्या, सच कहूँ तो सपने हैं : कुछ आधे हैं, कई अधूरे हैं। ब्लॉग पर मुख्यतः तीन कैटेगरीज हैं – “दुनिया में हूँ”, Poetry, और “पुराने ख़त”।

देखिये, दुनिया में हूँ, तो महसूस करता हूँ इसे। जैसा मैंने महसूस किया वो कहने की कोशिश है यहाँ। ‘Poetry’ में, पिछले तीन साल में मेरी लिखी हुई कुछ कविताएँ, या कविताओं जैसा जो कुछ लिखा है, अपनी समझ से चुन कर नियमित अंतराल पर पोस्ट करता रहता हूँ ; देखा जाए तो इसी वर्किंग कैपिटल के बल-बूते ये ब्लॉग शुरू करने की हिम्मत हुई। इसमें ‘कहा’ में मेरी लिखी कविताएँ हैं  और ‘सुना’ में वो कवि हैं जो मेरी अभिव्यक्तियों को साँस देते हैं। और अंत में, ‘पुराने ख़त’ वो हैं जो लिखे नहीं कभी।

मुझे पूरी उम्मीद है कि दोस्तों की मदद से अगले कुछ महीनों में बिखरी हुई अभिव्यक्तियाँ एक नई शक़्ल में होंगी।

और इन्ही सब को पूरा करते-करते, लिखते लिखते शायद कभी राइटर बन जाऊँ।

– अनाम

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