किसी-रात-अकेले

किसने कहा – चाँद है?
कुछ आँख है, कुछ नाक है।
दाग हैं!
हाँ, ये चाँद है।

किसने कहा – हवा चली?
एक ख़याल था, अभी आ कर गया।
हाँ, तू मन को छू कर गई;
हवा ही तो थी।

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एक बात सुनो

अभी आँखों में कुछ दर्द सा है
तो चलो, इन्हें जरा बंद करें –
अँधेरा है, पर रात नहीं;
दो हाथ तो हैं
पर साथ नहीं।

कभी आते-जाते यूँ ही मिलें,
तो चलो चाँद के साथ चलें।